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सहरसा शिक्षा भवन में भीषण आग, डीईओ कार्यालय के मीटिंग हॉल में लाखों की संपत्ति जलकर राख

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सहरसा जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय परिसर स्थित शिक्षा भवन में मंगलवार सुबह आग लगने से मीटिंग हॉल में रखा कंप्यूटर, एलईडी स्क्रीन और फर्नीचर जलकर नष्ट हो गया। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है।

सहरसा/आलम की खबर:सहरसा जिले के शिक्षा विभाग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण इमारत में मंगलवार सुबह अचानक आग लगने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय परिसर स्थित शिक्षा भवन की दूसरी मंजिल पर लगी आग ने कुछ ही देर में मीटिंग हॉल को अपनी चपेट में ले लिया। आग की इस घटना में कंप्यूटर, एलईडी स्क्रीन, टेबल, कुर्सियां और अन्य कार्यालयी सामान जलकर नष्ट हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि समय रहते अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और आग को भवन के अन्य हिस्सों में फैलने से रोक लिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंगलवार सुबह कार्यालय का नियमित कामकाज शुरू होने से पहले ही भवन के भीतर धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में लोगों को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन कुछ ही मिनटों में धुएं के साथ आग की लपटें दिखाई देने लगीं। इसके बाद शिक्षा भवन परिसर में मौजूद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच हड़कंप मच गया।

बताया जाता है कि आग शिक्षा भवन की दूसरी मंजिल स्थित मीटिंग हॉल में लगी थी। यह हॉल विभागीय बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता है। आग लगते ही वहां मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फर्नीचर तेजी से इसकी चपेट में आ गए। देखते ही देखते कमरे में रखा अधिकांश सामान जलने लगा।

घटना के बाद विभागीय कर्मचारियों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की। कुछ लोगों ने उपलब्ध संसाधनों से आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया, लेकिन आग की तीव्रता लगातार बढ़ती जा रही थी। ऐसे में तुरंत अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम आवश्यक उपकरणों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुई।

कुछ ही देर में अग्निशमन विभाग की दो गाड़ियां शिक्षा भवन परिसर पहुंच गईं। इसके साथ ही डायल-112 की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और सुरक्षा व्यवस्था संभालने लगी। आग लगने की खबर फैलते ही आसपास के लोगों की भीड़ भी बड़ी संख्या में जमा हो गई। पुलिसकर्मियों ने लोगों को सुरक्षित दूरी पर रहने की सलाह दी ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा उत्पन्न न हो।

फायर ब्रिगेड के जवानों ने पहुंचते ही आग बुझाने का अभियान शुरू किया। आग मीटिंग हॉल के भीतर केंद्रित थी, लेकिन यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह भवन के अन्य हिस्सों तक भी फैल सकती थी। करीब एक घंटे तक चले लगातार प्रयास के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया।

अधिकारियों के अनुसार आग से सबसे अधिक नुकसान मीटिंग हॉल में रखा इलेक्ट्रॉनिक और फर्नीचर संबंधी सामान को हुआ है। कंप्यूटर सिस्टम, एलईडी स्क्रीन, बैठक में उपयोग होने वाली कुर्सियां, टेबल और अन्य सामग्री जलकर नष्ट हो गई। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

इस घटना की सबसे राहतभरी बात यह रही कि किसी कर्मचारी या आम नागरिक को शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा। आग लगने के समय भवन में सीमित संख्या में लोग मौजूद थे और सभी सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है।

प्रारंभिक जांच में आग लगने के पीछे बिजली संबंधी तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी हो सकती है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। विद्युत प्रणाली और भवन के अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कराई जा रही है।

अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग मुख्य रूप से मीटिंग हॉल और सभा कक्ष तक सीमित रही। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक किसी सरकारी रिकॉर्ड या महत्वपूर्ण फाइल के नष्ट होने की सूचना नहीं मिली है। यदि आग रिकॉर्ड रूम तक पहुंच जाती तो प्रशासनिक कार्यों पर बड़ा असर पड़ सकता था।

डायल-112 पुलिस टीम ने भी राहत और बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया और फायर ब्रिगेड को आवश्यक सहयोग प्रदान किया। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के कारणों की हर पहलू से जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

घटना के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भवन की सुरक्षा व्यवस्था और विद्युत प्रणाली की समीक्षा शुरू कर दी है। संभावना जताई जा रही है कि जिले के अन्य कार्यालय भवनों में भी विद्युत सुरक्षा जांच कराई जा सकती है ताकि किसी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भवनों में नियमित रूप से अग्नि सुरक्षा उपकरणों की जांच और रखरखाव होना चाहिए। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि समय-समय पर वायरिंग की जांच और फायर सेफ्टी ऑडिट कराना आवश्यक है, विशेषकर उन भवनों में जहां बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग होता है।

फिलहाल शिक्षा विभाग द्वारा नुकसान का विस्तृत आकलन कराया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आग लगने के वास्तविक कारणों और नुकसान की सही जानकारी सामने आ सकेगी। इस बीच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की पूरी समीक्षा की जाएगी और भविष्य में सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।

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